उत्तराखंड वन एवं वन्य जीव

उत्तराखंड वन एवं वन्य जीव                 

• उत्तराखंड का क्षेत्रफल 53483 वर्ग किमी है। जिसमें से वन के अंतर्गत 38000 वर्ग किमी बन आते हैं। जो कुल क्षेत्रफल का 71.05% है।


• रिकार्ड वन-

वह वन जो सरकार द्वारा वन क्षेत्र घोषित किये जाते हैं। चाहे उस पर वन हो या न हो।

• उत्तराखंड में क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे अधिक वन पौडी (3271 वर्ग किमी) में पाये जाते हैं। और सबसे कम उ.सि.न में (564 वर्ग किमी) वन पाये जाते हैं।

• उत्तराखंड में सर्वाधिक वन प्रतिशत की दृष्टि से नैनीताल में 72% पाये जाते हैं। व सबसे कम वन प्रतिशत की दृष्टि से उ.सि.न. (22%) पाये जाते हैं। 

• उत्तराखंड में कुल वनों में गढ़वाल में 59.70% तथा कुमाऊ में 40.30% वन पाये जाते हैं।

• उत्तराखंड में वन क्षेत्रफल की दृष्टि से घटते क्रम में चार जिले

पौडी- 3271 वर्ग किमी 

उत्तरकाशी- 3144 वर्ग किमी

नैनीताल- 3089 वर्ग किमी.

चमोली- 2098 वर्ग किमी

ट्रिक- पडनाच PUNCH


•उत्तराखंड में कुल वन प्रतिशत की दृष्टि से घटते क्रम में चार जिले

नैनीताल- 72%

चम्पावत 65%

पौड़ी- 61%

बागेश्वर 61%

 

• सर्वाधिक खुले वन- पौटी

• सर्वाधिक सघन वन- पौढ़ी

• सर्वाधिक अति सघन वन- नैनीताल

• सर्वाधिक झाडी वाला जिला- टिहरी


• राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला नदी बेसिन टॉस (70.0%) अलकनंद (32-1%)


वनों के प्रकार-

• राज्य में ऊंचाई बढ़ने के साथ साथ धनों का कुल क्षेत्रफल व उनका प्रतिशत पहले बढ़ता है फिर एक निश्चित ऊंचाई के बाद पुन घटने लगता है।

• उत्तराखंड में 8 प्रकार के वन पाये जाते हैं। 

उपोष्ण कटिबंधीय वन-

• ऊंचाई- (750-1200 मी से कम)

• प्रमुख वनस्पति- साल, सेमल, हल्दू, खैर, बांस

• साल इन वनों की मुख्य विशेषता है।

• इनमें प्रतिवर्ष पतझड होता है।

• इनमें उत्तराखंड का पूरा उप हिमालय क्षेत्र आता है।


उपोष्ण कटिबंधीय शुष्क वन

• ऊंचाई (1500 से कम )

• प्रमुख वनस्पति- जामुन, बेर, गुलर

• यहां वर्षा कम होती है।


उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पतझड़ वन

• ऊंचाई (1500 मी तक)

• प्रमुख वनस्पति- सागौन, शहतूत, पलाश

• ये वन मानसूनी होते हैं जो एक समय में अपने पत्ते गिरा देते हैं। ये केवल दून द्वार या शिवालिक श्रेणी के क्षेत्रों में पाये जाते हैं।


कोणधारी वन

• ऊंचाई (900-1800 मी)

• प्रमुख वनस्पति- चीड

• चीड़ इन वनों की मुख्य विशेषता है।

• ये चट्टानी धरातल पर भी उग जाते हैं।

• राज्य में इस वन प्रजाति का सबसे अधिक विस्तार देखने को मिलता है।

• राज्य के कुल वन क्षेत्र के 15.25 प्रतिशत भाग में चीड़ के वन पाये जाते है।

• ये उष्ण कटिबंध व शीतोष्ण कटिबंध के बीच के वन है।


पर्वतीय शीतोष्ण वन

• ऊचाई (1800-2700 मी)

• प्रमुख वनस्पति देवदार, स्प्रूस बांज, बुराश

• पर्वतीय शीतोष्ण के दक्षिणी ढालों पर बॉज की प्रधानता रहती है।

• चौडी पत्ती वाले ये वन सदैव हरे भरे रहते है।

• ओक की तीन मुख्य प्रजातियां हैं बॉज, मोरू खर्श ।


एल्पाइन वन / उप एल्पाइन वन

• ऊंचाई (2700-3000 मी) प्रमुख वनस्पति- स्प्रूस, फर भोजपत्र, देवदार

• इन वनों के अंतर्गत वे पेड़ आते हैं जो तेलयुक्त होते हैं और यह पेड़ कच्चे ही जल जाते हैं।

• देवदार जैसे वृक्षों से सुगंधित तेल भी निकाला जाता है।


अल्पाइन झाड़ियां

• ऊंचाई (3000-3600 मी)

• प्रमुख वनस्पतियां - जूनियर, विलो, रिब्स

• इन वनों के अंतर्गत घास के मैदान पाये जाते हैं जिन्हें मीडो, पयार, बुग्याल, अल्पाइन पाश्चर कहते हैं। 

• यहां के पशुचारकों को चल घूमंतू अण्वाल, पालसी, बकरखाल, लवड्या, गुजर व गद्दी कहते हैं।


टुंड्रा वन

• ऊंचाई (3600-4800 मी)

•  वनस्पति- काई, घास

• इससे अधिक ऊंचाई पर बर्फाच्छादन रहता है।





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